कानपुरिया क्लासिक : 001

रज्जन भईया बड़ी तेजी से साईकिल से उतरे और दौड़ लगा दिये साथ मे चिल्लाते जा रहे थे "अरे लल्लन कहां हो बे,तुम्हारा हाईस्कूल का रिजल्ट आ गया "
लल्लन यानी लाल बिहारी शुकुल , बिचारे सुने तो पर मारे डर के अपनी खटिया मे सर छुपा लिन्ने। अब इसमें बिचारे लल्लन का कौनो दोष नही। पिछले चार साल से लगातार फेल हो रहे। पिछले दफा तो 100-100 रूपिया भी धरा कापी मे पर ढाक के वही तीन पात्र, फिर फेल। अबकी टिल्लू चाचा कहि दीनी कि अबकी लास्ट है। जौ लल्लन अबकी बेरा हाईस्कूल न करि पाये तो गोरखपुर का टिकट कटा दीवा जाये करै जाके बड़े भईया के साथ ठेकेदारी। अब लल्लन को दुख इस बात का नहीं था कि गोरखपुर जाना परी,  दुख तो इस बात का था कि पिन्की  से रिस्ता टूट जायि। पिन्की वही न , दालमण्डी वाले फूफा के किरायेदार। अब लल्लन की महतारी और बुआ की बहौत पटै सो बुआ ने पिन्की जो कि उनके यहाँ किरायेदार पड़ियाईन की तीसरे नम्बर की लड़की थी। पाड़े जी वही फूफा के यहां मुनीम थे और पड़ियाईन बुआ को सगी भाभी से भी ज्यादा मानती थी। अब लल्लन बचपने से पिन्की के साथ खेलते रहे तो मौका पाकर पड़ियाईन ने पिन्की और लल्लन की बात चलायी तो लल्लन की महतारी मना न कर पायी, और मना करने वाली कोई बात भी नहीं । पिन्की देखने  सुनने मे गोरी- चिट्टी और आठवाॅ पास काम काज मे भी अव्वल और तो और बुआ ने चुप्पे से ये भी बताया लल्लन की महतारी को कि पचास हजार रुपये भी पाड़े खर्चा करिहै। तो बात तय। अब लल्लन ने जबसे सुना कि पिन्की के साथ ब्याह तय हुआ तबसे लल्लन के पाँव जमीन पर नहीं है । और उधर ये भी तय हुआ कि लल्लन जैसे ही हाईस्कूल पास करिहे तैसे ही फूफा के यहा मुनीम की नौकरी पा जायेगे। गड़बड़ तो ये हुयी कि लल्लन ककोहाईस्कूल निकलना बिलकुल ऐसे लगने लगा जैसे एवरेस्ट की चढ़ाई हो।अब ऐसा भी नहीं कि लल्लन कमजोर होवे या पढ़ाई से जी चुरावे पर पता नहीं काहे ये इक्जाम बिलकुल गले का फाँस बन गया। अरे हरबार रिजल्ट आने से पहले पनकी वाले हनुमान बाबा से मनौती भी माना पर कुच्छौ काम नहीं आया।
 रज्जन भईया ने कमरे मे झांक के देखा तो लल्लन खटिया पर सर नीचे करे पड़े थे, पास आये तो देखा तकिया आँसू से भरी थी। रज्जन बोले " ऐ लल्लन काहे रोई रहे रिजल्ट तो देख लेयो चलि के " । रज्जन, लल्लन के पड़ोसी थे और लल्लन से दुई साल बड़े पर लल्लन और रज्जन की दोस्ती पूरे मोहल्ले मे प्रसिद्ध थी। पूरी दुनिया मे एक रज्जन ही थे जिनसे लल्लन को कोई परदा न था, यहाँ तक की रज्जन को ये भी पता था कि लल्लन ने दुई दफा पिन्की को मोतीझील घुमावा है और पिन्की को कोन वाली आईसक्रीम भी खिवायी है। खैर अभी तो लल्लन  रज्जन से लिपट के रोवे लगे और बोले " उई सार पाड़े पिन्की का बियाह काकूपुर बाले बाजपेयी के हिया कर दिहै। हम पास हुयी पायी"। रज्जन ने लल्लन को सम्हारा और बात ये तय हुयी कि चुपके से चलके घंटाघर के पास पहिले रिजल्ट देखेंगे और जो न पास हुये तो वही से स्टेशन चल के बंबई भाग लेंगे । अब इस पर रज्जन को कोई ऐतराज न था क्योंकि रज्जन के मन मे हीरो बनने का बहुत सुरूर चढ़ा था।
खैर दोनों निकल लिये और गुल्लक मे धरे साड़े छः सौ रूपये भी निकाल लिये और पहुँच गये घंटाघर ।
इधर घर पर लल्लन की छोटी बहिन छमकी ने आधी अधूरी बात सुन कर घर में चिल्लाना शुरू किया कि लल्लन फिर से हाईस्कूल फेल हो गये और रज्जन के साथ घर से भाग गये।
पूरा घर इक्कठा हो गया। लल्लन के चाचा बोले हम पहले ही कहते थे कि इसको भाई साहब के पास  गोरखपुर भेज दो पर नही उसे ती पढ़ा लिखा कर लाट साहब बनाना था। और ये रज्जन ये तो पहले से ही आवारा था। ये बात सुन कर रज्जन के पिता जी बोले कि जबान संभाल कर शुकुल । लल्लन के चक्कर में रज्जन बिगड़ गया और तुम उलटा दोष दे रहे। बात बढ़ते बढ़ते गाली-गलौज और हाथापायी पर पहुँच गयी।उधर फूफा जी को पता चला तो वो भी दौड़े चले आये। रोना पीटना मच गया तो फूफा सबको डाँटते हुये बोले अरे ये सब छोड़ो पहले चल कर स्टेशन पर दोनों को ढूँढो चल कर और न मिले तो पुलिस मे रिपोर्ट दर्ज कराओ चल कर।
 तीन घंटे बीत चुके थे दोनों का कही पता न चला। चाचा ने गोरखपुर भी खबर करा दी इधर मुहल्ले भर में बात आग की तरह फैल गयी थी। मुहल्ले की आठ-दस महिलाये लल्लन की अम्मा को घेरे बैठ कर दिलासा दे रही थी कि तब तक दरवाजे पर रिक्शा रुका और बुआ पड़ियाईन और पिन्की के साथ उतरी उन्हें देख कर लल्लन की अम्मा दहाड़ मार कर रोने लगी। बुआ और पड़ियाईन ने लल्लन की अम्मा को संभाला । तब तक पिन्की दौड़ कर चौके से पानी ले आयी।
तभी दरवाजे पर कुछ हलचल हुयी अम्मा, बुआ और सभी लोग बाहर भागे तो देखा कि रज्जन अपनी साईकिल पर लल्लन को बैठाये तेजी से चले आ रहे । साईकिल रुकती इससे पहले चाचा चिल्लाये कहां थे अभी तक। पर चाचा की बात अनुसुनी करते हुये लल्लन दौड़ कर अम्मा के पास पहुँचे और पैर छूकर बोले अम्मा हम हाईस्कूल पास हुई गये। तबतक लल्लन की अम्मा ने लल्लन के कान पकड़ कर बोली तो इत्ती देर कहां लगा दी। पीछे से रज्जन बोले अरे चाची वो इन्ने माना था कि अगर हाईस्कूल पास हो गये तो सबसे पहले पनकी जाकर हनुमान जी को परसाद चढायेगे सो हम घंटाघर से सीधे पनकी चले गये। उधर चाचा बोले हम तो पहिले ही कह दिये थे कि अबकी अपने लल्लन हाईस्कूल जरूर पास हो जायेगा। फूफा बोले अरे लल्लन की अम्मा जरा मिठाई तो मंगवाओ । बुआ बोली ऐ पिन्की तनिक चाय चढ़ा दो सर मे दर्द हो गया । इधर रज्जन चाचा , पिता जी और फूफा के साथ बैठ कर पूरा घटनाक्रम मय नमक-मिर्च बता रहे थे। लल्लन बोले अम्मा प्यास लगी है । अम्मा इससे पहले कुछ बोलती खुद लल्लन बोले लाओ हम खुद ही ले ले और चौके की तरफ चले अम्मा कुछ बोलती तबतक बुआ ने कनखईयो से अम्मा को चुप कराया। चौके मे लल्लन पहुँच कर पिन्की से बोले हम पास हो गये।पिन्की चुप रही तो लल्लन ने कागज मे लिपटा बेसन का लड्डू निकाला और पिन्की को देकर बोले ये स्पेसल प्रसाद हम शिर्फ तुमाये लये लाये। पिन्की ने लड्डू लेते हुये बोला तुम भागे जा रहे थे। तो लल्लन ने पिन्की के गाल छूकर बोला " तुमये छोड़ कर कहाँ जायेगे।"  पिन्की के गाल सुर्ख लाल हो गये , उधर चाय भी खौल-खौल सुर्ख लाल हो रही थी ।

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