अभी कल शाम ही मैंने "ये जवानी ..........." फिल्म देखि. एक डायलाग था "जिंदगी मे चाहे जितना भी पा लो कुछ न कुछ छूट ही जायेगा " कितना सच है ये……. हम सब कितनी ही चीजो के लिए हमेसा एक अंधी दौड़ लगाते है सब कुछ भूल के . लेकिन हांसिल क्या हुआ है इस बारे मे भी कभी सोचना चहिये . हम अपने पास के रिस्तो को भूले बैठे हैं और अनजान लोगो के साथ चैटिंग करते हैं .
मेरे दोस्तों आज एक बार अपने घर पर फ़ोन करना और बात करना पापा से मम्मी से अपनी दादी से दादा से .........गौर करना की शिर्फ़ वो तुम्हारी यादो के सहारे हैं . वो कभी नहीं कहेंगे अपनी तकलीफों के बारे में , वो हमेसा तुम्हरा भला ही कहेंगे . तुम जब नहीं होते हो उनके पास तो भी वो शिर्फ़ आपकी ही बात करते हैं . तो फिर देर किस बात की है उठाओ फ़ोन और बात कर लो ...........कुछ अपनी कहना कुछ उनकी सुनना उनको अच्छा लगेगा . ......... मित्रो फिर मुलाकात होगि…शुभ दिन !
मेरे दोस्तों आज एक बार अपने घर पर फ़ोन करना और बात करना पापा से मम्मी से अपनी दादी से दादा से .........गौर करना की शिर्फ़ वो तुम्हारी यादो के सहारे हैं . वो कभी नहीं कहेंगे अपनी तकलीफों के बारे में , वो हमेसा तुम्हरा भला ही कहेंगे . तुम जब नहीं होते हो उनके पास तो भी वो शिर्फ़ आपकी ही बात करते हैं . तो फिर देर किस बात की है उठाओ फ़ोन और बात कर लो ...........कुछ अपनी कहना कुछ उनकी सुनना उनको अच्छा लगेगा . ......... मित्रो फिर मुलाकात होगि…शुभ दिन !
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